5 बेस्ट कहानिया सफलता के लिए हिंदी में | Best Motivational Story In Hindi

आपको इस पोस्ट 5 Best Motivational Stories in Hindi में पांच ऐसी प्रेरणा दायक कहानिया मिलेंगी ,जो जिंदगी में आपका सोचने का तरीका बदल देंगी , 

आपको आपकी जिंदगी में सफल लोगो की Motivational तथा Inspirational स्टोरीज इसलिए पढ़ना जरूरी है क्योकि जो गलतिया उन महान लोगो ने सफल होने से पहले की है ,

वही गलतिया हम हमारे जीवन में नहीं करे , और यदि हम उन सफल लोगो के बारे में पढ़ेंगे नहीं तो हमें उनकी गलतियों के बारे में कैसे पता चलेगा , 

तो इसी लिए हमें प्रेरणा दायक कहानिया पढ़नी चाहिए , जिससे की हम लोग उन गलतियों को नहीं दोहराये और हमारी जिंदगी के  कीमती  समय को नष्ट होने से बचाये |

  तो चलिए चलते है ,हमारी पहली कहानी की तरफ ....

एक मजदूर से 1600 सौ करोड़ तक सफर /from a laborer to 1600 hundred crores


आज की ये कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है,जिसने यह साबित कर दिया कि ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए सिर्फ एक बड़ी और सोच उद्देश्य पूर्ति के लिए पक्का इरादा और कभी ना हार मानने वाले जज्बे की आवश्यकता होती है, मुसीबतें हमारी जीवन की सच्चाई है, कोई इस बात को समझ लेता है तो कोई पूरी जिंदगी मुसीबतो का रोना रोता फिरता है,जिंदगी के हर मोड़ पर हमारा सामना मुसीबतों से होता है|

इसके बिना जिंदगी की कल्पना भी नहीं की जा सकती है ,आज की हमारी इस पोस्ट " motivational stories in Hindi " में पहली कहानी एक ऐसे शख्श के बारे में है जिसके पास बचपन में दोस्तों के द्वारा दिए गए मुंबई जाकर काम ढूंढने के सुझाव के अलावा कुछ नहीं था ,

उस शख्श के लिए बिना फूटी कौड़ी के खाली पेट रहना और मुंबई के दादर स्टेशन पर सोने से ज्यादा तकलीफ देह था ,अपने पिता और भाई के कुछ दिन पहले हुए मौत सदमे से बाहर आना था|

ऐसी परिस्थितियों को पार करते हुए आज सुदीप दत्ता जी ने जो सफलता हासिल की है, वह आज के युवाओं के लिए सच में बहुत प्रेरणा स्रोत है, जो परिस्थितियों को दोष देकर हार मानकर बैठ जाते हैं,वो सुदीप दत्ता जी से जरूर कुछ सीख सकते है ,

पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर से संबंध रखने वाले इस बच्चे के पिता आर्मी में थे, 1971 की जंग में गोली लगने के बाद अपाहिज हो गए थे और ऐसी स्थिति में बड़ा भाई परिवार के लिए एक उम्मीद की किरण था ,

लेकिन आर्थिक तंगी के चलते परिवार बड़े भाई का इलाज न करवा सका और उसकी मृत्यु हो गई और उनके पिता भी अपने बड़े बेटे की मौत के सदमे में चल बसे , 

सुदीप जी की मां उनके लिए भावनात्मक सहारा जरूर थी, लेकिन उसके ऊपर चार भाई-बहनों की बड़ी जिम्मेदारी भी थी

अपने परिवार की जिम्मेदारी भी उसके ऊपर थी, उसके बाद दोस्तों के द्वारा दिया गया सुझाव तब सही साबित हुआ ,जब सुदीप जी के मुंबई में मजदूरी का काम मिला और रहने -सोने की जगह ऐसे कमरे में थी, जहां 20 मजदूर सोते थे कमरा इतना छोटा था ,

कि सोते वक्त हिलने की भी जगह नहीं होती थी,2 साल की मजदूरी के बाद उनके जीवन में नया मोड़ तब आया, जब नुकसान के चलते उसके मालिक ने फैक्ट्री बंद करने का फैसला किया,

ऐसी कठिन परिस्थिति सुदीप जी ने नई नौकरी ढूंढने के बजाय फैक्ट्री को चलाने का फैसला किया और सन 1975 में अपनी अब तक की बचाई पूंजी और किसी तरह दोस्तों से उधार लेकर ₹16000 इखट्टा किये ,

लेकिन फैक्ट्री खरीदने के लिए 16000 की राशि बहुत कम थी, लेकिन सुदीप ने 2 साल का मुनाफा बांटने का वादा करके किसी तरह फैक्ट्री मालिक को मना लिया ,इस प्रकार जिस फैक्ट्री सुदीप जी ने काम किया वह उसी फैक्ट्री के मालिक बन चुके थे |

19 साल के सुदीप जिसके लिए खुद का पेट भरने चुनौती थी, उसने सात अन्य मजदूरों के परिवार चलाने की जिम्मेदारी भी उठाई, एलुमिनियम पैकेजिंग इंडस्ट्री उस समय बुरे दौर से गुजर रही थी,

जिंदल ऐलुमिनियम कंपनी अपनी आर्थिक मजबूती के आधार पर मुनाफा कर पा रही थी,सुदीप यह जान गए थे कि बेहतर उत्पाद और नयापन ही उन्हें दुसरो से बेहतर साबित करेगा लेकिन अच्छा विकल्प होने के बावजूद जिंदलजैसे कंपनी के सामने टिक पाना आसान नहीं था|

सुदीप ने वर्षों तक बड़े ग्राहकों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता के बारे में समझाना जारी रखा और साथ ही छोटी कंपनियों के ऑर्डर्स के सहारे अपना बिजनेस चलाते रहें उनकी मेहनत तब रंग लाई जब उन्हें sun pharma ,cipla और नेस्ले जैसी बड़ी कंपनियों से ऑर्डर मिलने शुरू हो गए थे .

सुदीप ने सफलता का स्वाद चखा ही था, लेकिन उन्हें आने वाली चुनौतियों का बिल्कुल अंदेशा नहीं था, उद्योग जगत के वैश्विक दिग्गज अनिल अग्रवाल ने इंडिया फॉर नामक बंद पड़ी को कंपनी खरीदकर पैकेजिंग क्षेत्र में कदम रखा,

अनिल अग्रवाल और उनका वेदांत ग्रुप विश्व के चुनिंदा कंपनियों में से एक रहे हैं और उनके सामने टिक पाना नामुमकिन सा लक्ष्य था, लेकिन वेदांत जैसी कंपनी से प्रभावित न होकर सुदीप जी ने अपने उत्पादों को बेहतर बनाना जारी रखाऔर

आखिरकार वेदांत समूह को सुदीप की दृढ़ता के सामने घुटने टेकने पड़े और इंडिया फॉल कंपनी को सुदीप को ही पचना पड़ा, इस उपलब्धि के बाद सुदीप जी ने अपनी कंपनी को तेजी से आगे बढ़ाया|

सन 1998 से 2000 तक उन्होंने 20 प्रोडक्शन यूनिट स्थापित कर दिए थे ,आज उनकी कंपनी एस डी एलुमुनियम अपने क्षेत्र की नंबर वन कंपनी है और साथ ही मुंबई स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की सूची में भी शामिल है।

,अपनी अभिनव सोच के कारण उन्हें पैकेजिंग इंडस्ट्री का नारायण मूर्ति भी कहा जाता है, आज सुदीप जी कंपनी एलमुनियम का मार्केट कैप 1600 करोड़ से ज्यादा का है, जीवन में बहुत कुछ हासिल करने के बाद भी सुदीप अपनी पृष्ठभूमि से जुड़े हैं|

उनकी फैक्ट्री के सारे मजदूरआज भी उन्हें दादा कहकर बुलाते हैं, उन्होंने गरीब और जरूरतमंदों की सहायता के लिए "सुदीप दत्ता फाउंडेशन" [ Sudip Dutta Foundation ] की स्थापना की जो ग्रामीण क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं के लिए समय-समय पर नए अवसर प्रदान करती है|


2. एक आदमी और  एक गधे की कहानी /Story of a man and a Donkey


लाइफ में प्रॉब्लम चल रही है,कुछ समझ नहीं आ रहा है ,अगर सपनों के सफर में हारने का मन कर रहा है ,सब कुछ छोड़कर नॉर्मल जिंदगी जीने का मन कर रहा है ,तो यह कहानी आपको हिम्मत देगी ओर इस छोटी सी कहानी से आपको काफी कुछ सीखने को मिलेगा | तो आज की हमारी इस पोस्ट 5 best motivational and inspirational stories in Hindi 2020 में हमारी दूसरी कहानी यह रही |

यह कहानी है ,एक आदमी और एक गधे की इस कहानी को ध्यान से पढ़ना और समझने की कोशिश करना क्योंकि यह कहानी आपकी सोच बदलकर रख देगी ,एक आदमी जंगल से जा रहा होता है ,उसके साथ में एक गधा होता है, थोड़ी दूर चलने के बाद वह गधा एक गड्ढे में गिर जाता है ,वह गधा काफी कोशिश करता है उस गड्ढे से बाहर निकलने की लेकिन काफी मेहनत के बाद भी वह गधा उस गढ़े से बाहर नहीं निकल पा रहा था , उस आदमी ने भी काफी अलग-अलग उपाय सोचे लेकिन वो आदमी भी हार मानकर यह सोचता है,

कि उसका गधा अब उस गड्ढे से कभी बाहर नहीं निकल सकता है ,वह आदमी सोचता है कि अब गधे को इसी गड्ढे में दफन कर देना चाहिए ,ताकि इसे कोई जानवर मार कर खाना ले, थोड़ी ही दूर मिट्टी का ढेर होता है, वह आदमी मिट्टी के ढेर से मिट्टी लाकर थोड़ी-थोड़ी मिट्टी उस गधे के ऊपर डालता है, लेकिन कमाल की बात तो यह होती है कि गधा दफन होने के बजाय मिट्टी के सहारे आहिस्ता -आहिस्ता ऊपर आने लगता है,
क्योकि जब वह आदमी धीरे -धीरे डालता है,तो उस मिट्टी की वजह से वह गढ्ढा भरता जाता है और वह गधा ऊपर आ जाता है , दोस्तों उस आदमी ने जिस तरीके को सोचकर उस गधे को दफनाने का निश्चय किया था , लेकिन जिस तरीके से वो आदमी उस गधे को दफना रहा था, उसी तरीके से उस गधे की जिंदगी बच गई ,
 


सीखने की बात - 

दोस्तों हमारी लाइफ में भी बार-बार ऐसा वक्त आता है, जब हमें लगता है कि हमारी जिंदगी में ऐसी मुश्किल है, जिसका कोई हल नहीं है, 

लेकिन सच्चाई तो यह है ऐसे कोई मुश्किल ही नहीं है ,जिसका हल न हो ,हर मुश्किल का हल है,और वो हल उसी समस्या में छिपा हुआ है ,और वो समस्या इसलिए आपके जीवन में आयी है , क्योकि आप ही है जो उस समस्या का हल निकाल सकते हो |

3. विकलांग होने से लेकर सबसे तेज दौड़ने वाली महिला /Disabled to Fastest Running Woman

दोस्तों ,ये 5 best motivational and inspirational stories in Hindi 2020 पोस्ट में हमारी तीसरी कहानी है ,

मुझे पूरी उम्मीद ही नहीं पूरा विश्वाश भी है की आपको पहली दोनों कहानिया बहुत पसंद आयी होंगी , और अपने उन दोनों कहानियो से बहुत कुछ सीखा होगा |
तो इसी सीखने  की अगली कड़ी में हम बढ़ते है ,

हमारी तीसरी  कहानी की तरफ ....

ये कहानी एक ऐसी लड़की की है ,जिसने अपने बचपन में ही ऐसे -ऐसे दुखो से संघर्ष किया है ,की हम उन दुखो के बारे में सोचकर भी डरते है ,ये कहानी है  "विल्मा रुडोल्फ"  जिन्होंने अपने बचपन में ही बहुत सी बीमारियों से लड़कर दुनिया की सबसे तेज दौड़ने वाली महिला तक का सफर तय किया है ,

विल्मा रुडोल्फ का जन्म टेनिसी के एक बेहद ही गरीब परिवार में हुआ था ,चार साल की उम्र में बहुत भयानक बुखार के साथ -साथ डबल निमोनिया की बीमारी हो गयी थी ,जिसके कारण वह पोलियो से भी ग्रसित हो गयी थी 

,लेकिन इस बुरे समय में भी विल्मा के माँ उनके साथ हमेश खड़ी  रहती थी ,और उन्हें प्रोत्साहित करते हुए कहती थी की  " भगवन की दी हुई योग्यता ,ढृढता और विश्वाश तुम भी जरूर कुछ कर सकती हो "
 इसके बाद विल्मा बोली  " में इस दुनिया कि सबसे तेज दौड़ने वाली महिला बनना  चाहती हु " .

इसके बाद डाक्टरों का कहना ये था की वे अब कभी भी चल नहीं सकती , जिसके कारण विल्मा को एक झटका सा लगा ,परन्तु डाक्टरों की सलाह के विरुद्ध जाकर उन्होंने 9 साल की उम्र में उन्होंने अपने पेरो में से ब्रेस उतार फेके और अपना पहला कदम आगे बढ़ाया , जिसे डॉक्टरों ने असंभव बताया था 

13 साल की उम्र में उन्होंने अपनी पहली रेस में हिस्सा लिया और सबसे आखिरी स्थान पर आयी थी ,और उसके बाद उन्होंने अपनी दूसरी ,तीसरी ,चौथी  , पांचवी  रेसो में हिस्सा लिया और आखिरी स्थानों पर आती रही परन्तु विल्मा ने भी  अपनी  ढृढ़  इच्छा शक्ति को बरकरार रखते हुए ,हार नहीं मानी थी ,फिर एक दिन वो रेस तथा वो पल भी आया जब वो रेस में  सबसे पहले स्थान पर आयी थी ,15 की उम्र में विल्मा  ने  टेनिसी स्टेट युनिवेर्सिटी में दाखिला ले लिया था| 

जहां उनकी मुलाकात एक कोच से हुई जिनका नाम ऐड टेंपल था ,विल्मा ने कहा की "मैं इस दुनिया की सबसे तेज धाविका बनना चाहती हूं" तब कोच टेम्पल ने कहां "तुम्हारे अंदर जिस तरह का जज्बा और दृढ़ इच्छाशक्ति है ,
तुम्हें कोई नहीं रोक सकता और उसके अलावा मैं भी तुम्हारी मदद करूंगा"तो वह दिन भी आ गया जब विल्मा ओलंपिक्स में पहुंच गई जहां अच्छे से अच्छे एथलीटों के साथ उनका मुकाबला होना था, 

जिसमे हार ना मानने वाली यूयूटा हिन् भी शामिल थी,पहले 100 मीटर की रेस हुई जिसमे विल्मा ने यूटा को हराकर गोल्ड मेडल जीता, फिरदो 200 मीटर के मुकाबले में विल्मा ने यूटा को बहुत ही बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया और अपना दूसरा गोल्ड मेडल जीत गई ,

इसके बाद तीसरा इवेंट 400 मीटर रिले रेस थी,जिसमे सबसे तेज दौड़ने वाली खिलाडी सबसे अंत में दौड़ना होता है|

विल्मा और यूटा भी अपनी -अपनी टीमों से आखरी में दौड़ रही थी पहली 3 एथलीट्स ने आसानी से बेटन बदल ली, 
जब विल्मा की बारी आई तो थोड़ी गड़बड़ हो गई और बेटन गिरते-गिरते बची इस बीच यूटा आगे निकल गई , और विल्मा ने बिना देरी किये अपनी स्पीड बढ़ाई और मशीन की तरह तेज दौड़ते हुए आगे निकल गई और यूटा को हराते हुए अपना तीसरा गोल्ड मेडल जीत गई और यह इतिहास बन गया |

सीखने वाली बात -

चाहे कोई भी व्यक्ति ,कितनी भी परेशानियों से क्यों न घिरा हो , व्यक्ति अपनी ढृढ़ इच्छा शक्ति तथा अपने जजबे के साथ अपनी जिंदगी में किसी भी मुकाम पर पहुंच सकता है , और उन्ही के जैसे दूसरे लोगो के लिए प्रेरणा का स्त्रोत भी बन सकता है |

तो चलिए चलते है ,हमारी चौथी  कहानी की  ओर ....

4. सफलता का रहस्य /SECRET OF SUCCESS -

दोस्तोंहम और आप हम सब ही अपने जीवन में बहुत सफल होना चाहते है ,और अपने इस जीवन में कुछ अलग तथा कुछ बड़ा करने के लिए हमेशा अग्रणी रहते है ,और इसके बारे में भी सोचते रहते है की ,क्या कोई ऐसा तरीका है ,कि जिससे हमें रातो -रात सफलता मिल जाये ,क्या कोई ऐसा सीक्रेट है ,

 अपनाकर हम अपने जीवन में बहुत जल्दी सक्सेसफुल हो जाये, तो मेरे प्यारे दोस्तों आप सफलता के बारे में जो भो सोचते हो ,इस कहानी को पढ़ने के बाद आपकी सोच हमेशा के लिए बदल जाएगी | 
 
एक बार एक नौजवान लड़के ने सुकरात से पूछा की  " सफलता का रहस्य क्या है ?"
तब सुकरात ने उस लड़के से कहा की " तुम कल मुझे नदी के किनारे मिलो "
वह सुभह के समय  नदी के किनारे मिले ,

फिर सुकरात ने नौजवान लड़के से  उनके साथ नदी की तरफ बढ़ने को कहा ,और जब आगे बढ़ते -बढ़ते पानी लड़के और सुकरात के गले तक पहुँच गया ,तभी अचानक !! सुकरात ने उस लड़के का सिर  पकड़ के नदी के पानी में डुबो दिया ,लड़का बाहर निकलने के लिए तड़पने और  छटपटाने लगा ,

लेकिन सुकरात ताकतवर था ,उसने उस लड़के को तब तक डुबोये रखा ,जब तक की उस लड़के का शरीर नीला नहीं पड़ने लगा ,फिर सुकरात ने उस लड़के का सर पानी से बाहर निकल दिया ,और बाहर निकलते ही जो चीज़ उस लड़के ने सबसे पहले की,हाँफते -हाँफते  तेजी से साँसे लेने लगा ,

सुकरात ने  उस लड़के से पुछा   "" जब तुम पानी के भीतर थे ,तो तुम सबसे ज्यादा क्या चाहते थे "" लड़के ने उत्तर दिया  "" सांस लेना सबसे ज्यादा जरूरी था ""
सुकरात ने मुस्कुराते हुए उस लड़के से कहा की   "" यही है सफलता का रहस्य ""

जब तुम सफलता को उतनी ही बुरी तरह से चाहोंगे ,जितना की तुम सांस लेना चाहते थे ,जब तुम्हारा सर पानी के अंदर था ,तो सफलता तुम्हे अवश्य ही मिल जाएँगी ,उसके अलावा सफलता का और कोई रहस्य नहीं है |

मेरे प्यारे दोस्तों यदि आप सिर्फ और सिर्फ अपने जीवन में एक ही चीज चाहते हैं, तो वह चीज आपको मिल ही जाती है, जैसे अपने आस-पास छोटे बच्चों को देख लीजिए, वो बच्चे न तो भविष्य में जीते हैं और ना भूतकाल में जीते है ,

वे तो हमेशा वर्तमान में अपना जीवन बिताते हैं और जब उन्हें खेलने के लिए कुछ खिलौना चाहिए होता है या खाने के लिए कोई चॉकलेट चाहिए होती है, तो उनका पूरा ध्यान और उनकी पूरी शक्ति बस उस चीज को पाने में लग जाती है, और वह अपनी उस चीज को पा ही लेते हैं|

सीखने की बात - इसलिए सफलता पाने के लिए फोकस बहुत जरूरी है,सफलता को पाने की जो चाह आप में होती है ,और जो लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति आप में होती हैं ,वह सफलता को आपके पास लाकर रखी देती है और जब आप फोकस के साथ अपने काम में जुटते हैं, तो सफलता आपको निश्चित ही मिल ही जाती है|
तो चलिए चलते है ,हमारी पांचवी और आखिरी कहानी की ओर ....

5. बाज की उड़ान /Eagle flight -

आज की एक पोस्ट 5 best motivational and inspirational stories in Hindi 2020 की पांचवी कहानी की ओर एक बार की बात है ,एक बाज का अंडा मुर्गी के अंडो के बीच आ गया ,कुछ दिनों बाद उन अंडो में से चूजे निकले ,बाज का बच्चा भी उनमे से एक था ,वह उन्ही बड़ा होने लगा |

वो वही करता था ,जो मुर्गी के बाकि चूजे करते थे ,मिटटी में इधर -उधर खेलता ,दाना चुगता और दिन भर उन्ही की तरह चू -चू करता था |

बाकि चूजों की तरह वह भी बस थोड़ा सा ही ऊपर उड़ पाता था ,और पँन्ख फड़फड़ाते हुए निचे गिर जाता था | फिर एक दिन उसने एक बाज को खुले आकाश में उड़ते हुए देखा ,बाज बड़ी शान से बेधड़क उड़ रहा थे ,तब उसने बाकि के मुर्गी के चूजों से पुछा, " की इतनी उचाई पर उड़ने वाला वह शानदार पक्षी कौन है ,तब मुर्गी के चूजों ने कहा "अरे वो तो बाज है ,पक्षियों का राजा " वो बहुत ही ताकतवर है |

लेकिन तुम उसकी तरह नहीं उड़ सकते हो ,क्योकि तुम तो एक चूजे हो, बाज के बच्चे ने ऐसी बात को सच मन लिया था, और कभी भी वैसा बनाने की कोशिश नहीं की थी | वो जिंदगी भर एक चूजे की तरह ही रहा ,और एक दिन बिना अपनी असली ताकत पहचाने ही मर गया |

सीखने वाली बात

दोस्तोंहममे से बहुत से लोग उस बाज की तरह ही अपनी असली ताकत जाने बिना एक मीडियम क्लास की जिंदगी जेते रहते है| हमारे आस - पास के साधारण लोग हमें भी वही बना कर रख देते है, हम ये भूल जाते है की हम अपार सम्भावनाओ से पूर्ण एक प्राणी है , 

हमारे लिए इस जग में कुछ भी असंभव नहीं है | परन्तु फिर भी हम एक औसत जीवन जीकर बहुत बड़े मौको को गवा देते है |

आप चूजों की तरह मत बनिए ,अपने आप पर, अपनी काबिलियत पर भरोसा कीजिये | आप चाहे जहा हो,जिस परिवेश में हो और अपनी क्षमताओं को पहचानिये और एक असली बाज की तरह आकाश की उचाईयो पर उड़ कर दिखाइए, क्यकि यही आपकी वास्तविकता है |

मेरी तरफ से अंतिम शब्द -

मेरे प्यारे दोतो मझे पूरा विश्वाश है ,कि आप लोगो को ये पोस्ट बहुत पसंद आयी होगी और आज अपने इस पोस्ट में लिखी हुई पांच सबसे सर्वश्रेष्ठ कहानियो को पढ़कर अपने जीवन में भी कुछ बड़ा करने का निर्णय जरूर लिया होगा ,और अवश्य ही लेना चाहिए ,

क्योकि  इस धरती पर प्रत्येक व्यक्ति का जन्म कुछ अलग करने के लिए हुआ है | तो इसी के साथ में आप सभी से विदा लेता हु ,और ऐसी ही प्रेरणादायक कहानियो तथा ऊर्जावान कथनो से आपके जीवन में थोड़ा -थोड़ा योगदान करता रहूँगा | और हां एक अच्छे इंसान के नाते इस पोस्ट को अपने दोस्तों तथा अपने सोशल एकाउंट्स पर भी जरूर शेयर कीजिये तथा दुसरो के जीवन को अच्छा बनाइये |

धन्यवाद्

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