➤अब्दुल कलाम जी की प्रेरणादायक कहानी हिंदी | APJ Abdul Kalam Ki Kahani In Hindi

Best short motivational story >> नमस्कार दोस्तों, आपका बहुत -बहुत स्वागत है, हमें अपने जीवन में Motivational Stories की आवश्यकता इसलिए पड़ती है। 
Credit: Live Hindi 
क्योकि हम उन Inspirirng and Motivational Stories को पढ़कर हम अपने जीवन में कुछ बड़ा करने की प्रेरणा प्राप्त कर सके तब आप सही जगह आये है। आज आपको एक ऐसी Short Motivational Story In Hindi कहानी बताने जा रहा हूँ। 
अब्दुल कलाम जी की  कहानी
Abdul Kalam Story In Hindi

आप उसे पढ़ने के बाद अपने आप को कभी छोटा तथा दुखी महसूस नहीं करेंगे और जीवन में आने वाली समस्याओ से कहेंगे की। 

 " कितना साहस हे तुममे उससे दस गुना अधिक साहसी हूँ तुमसे  " और आप अपने जीवन में कुछ भी करने के लिए प्रेरित होंगे। तो चलिए शुरू करते है ..........

अब्दुल कलाम जी की प्रेरणादायक कहानी | APJ Abdul Kalam Ki Kahani In Hindi

आज हम जिस सख्शियत के बारे में आगे आने वाली इस कहानी में जानेंगे। उस लड़के ने बचपन से ही बहुत दुविधाओं को पार करते हुए अपने तथा अपने देश का नाम रोशन किया था। जी वो और कोई नहीं ! Dr. APJ ABDUL KALAM [ डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ] जी है। 

Abdul Kalam Ki Kahani In Hindi
"" सपने वो नहीं जो ,सोते समय देखे जाते है,
सपने तो वो होते है ,जो हमें सोने नहीं देते है ""
- डाक्टर एपीजे अब्दुल कलाम

अब्दुल कलाम जी का बचपन:

दोस्तों जब अब्दुल कलाम जी ने 15 अक्टूबर सन 1931को  तमिलनाडु के एक छोटे से गांव में जन्म लिया ,उनका परिवार एक तमिल मुस्लिम परिवार था। इनके पिता का नाम जेनुअलुद्दीन थे। 

जिनके पास एक छोटी सी नाव थी तथा वो तीर्थ करने आये हुए हिन्दू यात्रियों को एक किनारे से दूसरे किनारे पहुंचाते थे। इस काम से उनका केवल घर ही चल पता था। 

पास ही की मस्जिद में इमाम भी थे। दोस्तों कलाम जी का परिवार बहुत ही ज्यादा गरीब तथा उनके पिताजी नाव चलाकर तथा कुछ दूसरे काम करके बहुत मेहनत करने के बाद अपने परिवार का पेट भर रहे थे। समय चलता गया और कलाम जी अब थोड़े बड़े हो रहे थे।                                           
अपनी पारिवारिक तथा आर्थिक स्थिति को देखकर उन्हें ये पता चल गया था। उन्हें किसी भी तरह चार पैसे कमाना चाहिए तथा घर चलाने में अपने पिता की मदद करनी चाहिए। 

अब्दुल कलाम जी का शुरुआती जीवन:

तब उन्होंने साईकिल से अख़बार डालने काम छोटा मोटा काम किया था। इस काम से अधिक तो नहीं परन्तु कुछ पैसे इकठे हो जाते थे, जिन पैसो से घर का गुजारा चल जाता था।

अखबार तथा मैगजीन बेचने के बाद जो समय बचता था। अब्दुल कलाम उस समय में बहुत मेहनत के साथ पढाई करते थे और वो बहुत होशियार थे। 

कलाम सर को हमेशा से कुछ न कुछ नया तथा लगातार सीखते रहना बहुत पसंद थे। उन्होंने अपनी शुरूआती पढाई पास के ही एक स्कूल से की थी। स्कूली पढाई के बाद कलाम सर ने तिरूचिराप्पल्ली के सेंट जोसफ कॉलेज में दाखिला ले लिया था। 

अब्दुल कलाम जी की शिक्षा:

इस कालेज में उन्होंने भौतिकी में प्रवेश ले लिया तथा उन्होंने बड़ी ही लगन के साथ पढ़ते हुए अपनी ग्रेजुएशन सन 1954 में पूरी की थी। कलाम जी अपने पढ़ने लिखने के शौक को भी मुसीबतो और घर की आर्थिक स्थिती के आड़े नहीं आने दिया। 

और उनकी पढाई को लेकर कलाम सर को उनके घर वालो ने भी बहुत सपोर्ट किया ,उनके परिवार वालो ने कलाम सर की आगे की पढाई के लिए उन्हें प्रोत्साहित करते हुए आगे की पढाई करवाई। कलाम सर 1955 में मद्रास आ गए थे।  

यहाँ मद्रास इंस्टीटूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में अंतरिक्ष विज्ञान की शिक्षा ग्रहण करना शुरू कर दीं थी। बड़ी लगन तथा मेहनत से पढाई पूरी करने के बाद उन्हें रक्षा अनुसंधान तथा विकास संगठन DRDO में एक वैज्ञानिक के तौर पर चुने गए थे। 

जीवन में आगे बढना:

ये पद उन्हें उनकी काबिलियत तथा उनके विज्ञान और अंतरिक्ष में रूचि को देखकर दिए गया था। अपनी मेहनत के दम पर अब्दुल कलाम सर ने एक गरीब परिवार से निकलकर DRDO में वैज्ञानिक के रूप में पद हासिल करना उनके तथा उनके परिवार के लिए गर्व की बात थी। 

यह अपना काम शुरू करने के कुछ समय बाद वे भारतीय वायुसेना के लिए एक हवाई जहाज [ प्लेन ] का डिजाइन बनाया। लेकिन कलाम सर तो बहुत बड़े लक्ष्य रखने वाले व्यक्ति थे। इसलिए उन्हें DRDO में काम करके संतुष्टि नहीं मिल रही थी। इस संस्थान में बहुत सीमित काम करने होते थे। जिस कारण कलाम सर को बहुत अधिक संतुष्टि नहीं मिल रही थी। 

परन्तु DRDO में सीमित दायरे में अपने काम को करते हुए कुछ वर्षो के बाद सन 1969 में अब्दुल कलाम सर का ट्राँसफर ISRO { INDIAN SPACE RESEARCH ORGANISEATION } भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संघठन में हो गया था। 

जीवन में अब्दुल कलाम जी की सफलता :

यहाँ इसरो में डाक्टर कलाम ने बहुत मेहनत करने के बाद उन्हें एक सेटेलाइट प्रोजेक्ट का डायरेक्टर बनाया गया था। उन्होंने इसरो के लिए बहुत लगन से काम करते हुए। 

बहुत सारे प्रोजेक्ट्स में अपना अहम योगदान दिया और उनके ही योगदान के चलते इसरो बहुत ही कम समय में भारत के अंतरिक्ष अनुसन्धान के रूप में उभरकर सामने आया है। 

कलाम जी ने इसरो में रहते हुए अग्नि, त्रिशूल, नाग इत्यादि, मिसाइलों के निर्माण में बहुत बड़ा योगदान दिया है तथा भारत को मिसाइल और रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया है और इतना ही नहीं वो इसरो में डायरेक्टर के तौर पर काम करते हुए। उन्होंने इसरो में बहुत सारे नए युवाओ तथा टेलेंटेड व्यक्तियों को स्थापित किता डॉक्टर कलाम आने वाले वैज्ञानिको तथा अंतरिक्ष के क्षेत्र में काम करने वाले युवाओ के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत है। 

एक प्रभावशाली वैज्ञानिक के तौर पर उन्होंने भारत को बहुत सारी मिसाइल दी तथा दुनिया को दिखा दिया की भारत भी किसी से कम नहीं है। एक बेहतरीन वैज्ञानिक के तौर पर काम करते हुए। उन्हें भारत के राष्ट्रपति के रूप में चुना गया और उनका राष्ट्रपति के रूप में चुना जाना बहुत बड़ी और सन्मान की बात थी।
 उन्हें सन 2002 में राष्ट्रपति पद के लिए सर्वसन्मति से चुना गया था और उनका कार्यकाल सन 2002 से 2007 तक था और उन्होंने अपने कार्यकाल में बहुत ही अच्छे तरीके से अपने कामो को पूरा किया। तब कलाम सर की उम्र भी बढ़ने लगी थी। 


और इसी उम्र में आकर एक औसत व्यक्ति आराम करने की सोचता है तथा अपने आराम से रहने का इतजाम करते है। लेकिन कलाम सर बिलकुल भी औसत व्यक्ति नहीं थे वो तो लाखो करोडो लोगो के प्रेरणा स्त्रोत थे। उन्होंने आराम करने की बजाय उन्होंने बहुत सारी जगहों पर लोगो को एक दिशा प्रदान करने के लिए प्रोफ़ेसर के तौर पर काम किया तथा लोगो के जीवन में योगदान देने का फैसला किया।

इसके बाद अपना पूरा समय नवयुवको के मार्गदर्शन तथा भारत को रक्षा के क्षेत्र में बेहतर बनाने में लगा दिया। मनुष्यता की भलाई तथा समाज को बेहतर बनाने के लिए उन्होने अपना सम्पूर्ण जीवन देश और समाज के नाम कर दिया। कलाम सर ने 27 जुलाई 2015 को एक संसथान में अध्यापन कार्य करते हुए। उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उन्होंने हमें और देश को अलविदा कह दिया। 

दोस्तों अब्दुल कलाम सर का कहना यह था की समस्याए हमें जीवन में पीछे करने नहीं बल्कि हमें बहुत कुछ सीखाने तथा आगे बढ़ाने के लिए आती है। इनका सामना करके हम और बेहतर बनते जाते है। समस्याए हमारे भीतर छुपी हुए काबिलियत तथा सम्भवनाओ को बाहर लाने में मदद करती है। कलाम सर कहते है। की कठिनाई को यह जान लेने दो की आप कठिनाइयों से भी अधिक कठिन हो। 

अब्दुल कलाम सर की कहानी से सीख 

डाक्टर अब्दुल कलाम सर उन सभी लोगो के लिए एक मिसाल है। जिन्हे ये लगता है की उनके जीवन में सबसे अधिक समस्याए है। कलाम जी के सामने हमारी समस्याए तो कुछ भी नहीं है। हमें अच्छा खाना मिल रहा है रहने के लिए घर मिला है। 

हम हमारी भौतिक जरूरतों तथा जीवन की तीन मूलभूत आवश्यकता रोटी, कपडा और मकान हमारे पास है, परन्तु कलम सर की जिंदगी इतनी आसान नहीं थी। उन्हें रहने के लिए एक झोपडी मिली थी उन्हें स्वयं अख़बार तथा मैगजीन बेचकर एक वक्त के खाने का इंतजाम करना होता था। 

उनके जीवन की समस्याओ तथा दुखो के सामने हमारे दुःख तथा तकलीफ कही भी नहीं ठहरते है। कलाम सर कहते है  "आपके जीवन में समस्याए आपको कमजोर करने नहीं बल्कि इतना अधिक मजबूत करने आती है, की आप लड़कर आगे बढ़ सके और कठिनाइयों से भी कठिन हो जाये। 


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