>> सरस्वती पूजा पर हिंदी में निबंध | Saraswati Puja Essay In Hindi

Essay on Saraswati Puja > दोस्तों सरस्वती माँ विद्या और विनय की देवी मानी जाती है , और जिसके भी पास विद्या और विनय होता है वो जीवन के किसी भी क्षेत्र में दुसरो से कभी भी पीछे नही रहता है। 

>> सरस्वती पूजा पर हिंदी में निबंध | Saraswati Puja Essay In Hindi

जिसके उपर माँ सरस्वती की कृपा होती है, उस व्यक्ति की बुद्धि और उसकी समझ में अलग ही परिवर्तन आने लगता है। इस बार भी माँ सरस्वती वसंत ऋतू में बसंत पंचमी में सभी को आपने ज्ञान से परिपूर्ण करने के लिए आ रही है। हमें उसके स्वागत के लिए सबसे अच्छी तैयारी के साथ उनका स्वागत करना चाहिए।  

ताकि उनकी कृपा हमेशा हमपर बनी रहे और हम जीवन में हमेशा ही तरक्की करते रहे , माँ सरस्वती को विद्या वर दायनी के नाम से जनि जाती है। 

खासकर स्टूडेंट्स के लिए माँ सरस्वती की पूजा Essay का बहुत ही महत्त्व है। क्योकि माँ सरस्वती ही होती है। जो किसी भी स्टूडेंट को उसके लक्ष्य तक पहुचाती है और उसे सही बुद्धि प्रदान करती है। आज हम सरस्वती पूजा पर एक प्यारा सा निबंध लिखेंगे। जिसमे हम सरस्वती माँ की पूजा को और भी अच्छे से जानेंगे। 

सरस्वती पूजा पर हिंदी में निबंध || बसंत पंचमी पर निबंध इन हिंदी

सरस्वती माँ की पूजा का महत्त्व - 

वैसे तो पुरानो में भी माँ सरस्वती की पूजा और उनकी शक्तियों को ब✋ड़े ही व्यापक तरीके से बखान किया गया है 

हम आपको बता दे की यदि आपको जीवन में अच्छी समझ और बुद्धि के साथ ही साथ अच्छा कला - कौशल भी चाहिए। तब आपको माँ सरस्वती की पूजा करके उन्हें अवश्य ही प्रसन्न करना चाहिए। माँ सरस्वती जी को प्रसंन्न करने का अवसर यही है। 

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की आप माँ सरस्वती की पूजा बसंत ऋतू में सरस्वती पूजा के दिन ही करे। ताकि आप माँ सरस्वती को अपने लिए प्रसन कर सके और खुद के लिए बेहतर और सफल जीवन की कामना कर सके। 

हिन्दू धर्म में तो माँ सरस्वती की पूजा का ख़ासा महत्व बताया जाता है और ऐसा माना जाता है की जो व्यक्ति अथवा विद्यार्थी बसंत ऋतू में माँ सरस्वती का ध्यान अथवा उनकी पूजा करता है। माँ सरस्वती उन्हें मीठी बोली के साथ -साथ एक सम्पूर्ण सोच तथा बुद्धि भी प्रदान करती है। 

इस त्यौहार में लगभग सभी पीले वस्त्रो को धारण करते है और सभी स्टूडेंट्स के लिए सरस्वती पूजा किसी दीपावली से कम नही होती है। इसीलिए आपको भी अवश्य ही इस बार माँ सरस्वती की पूजा जरूर करनी चाहिए। ताकि आप भी माँ के आशीर्वाद को प्राप्त कर अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सके। 

वातावरण का महत्त्व  - 

माँ सरस्वती की पूजा वसंत ऋतू के माह में आती है जब चारो तरफ केवल हरियारी ही हरियाली होती है और सभी तरफ से सरसों के फूलो के साथ - साथ कोयल की प्यारी सी कूक भी सुनाई पड़ती है। 

माँ सरस्वती को विद्या तथा संगीत की देवी माना जाता है और ऐसी मान्यता है की जो भी व्यक्ति माँ सरस्वती की पूजा को अच्छे तरीके से करता है। माँ सरस्वती उसे अपार बुद्धि के साथ -साथ अमूल्य कला -कौशल भी प्रदान करती है।  

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माँ सरस्वती को गुलाप्ती के पुष्प अत्यंत प्रिय होते है , और ये फूल केवल बसन्त ऋतू के मौसम में ही फूलते है , तब हमें भी माँ सरस्वती की आराधना करने के लिए और उनकी पूजा को अच्छे से करने के लिए चारो तरफ फूल बिखेरने चाहिए और अपने घरो को सुंदर -सुंदर फूलो से अच्छे से सजा देना चाहिए। 

क्योकि माँ सरस्वती को हमेशा ही हरियाली और स्वछता पसंद आती है , आपको चाहिए की आप सरस्वती पूजा पर आपने आस -पास का वातावरण साफ़ और सुंदर बनाये रखे। 

प्रकृति की सुन्दरता - 

आप मानो अथवा न मानो लेकिन यह बात तो है की जब भी माँ सरस्वती बसंत ऋतू की बसंत पंचमी पर आती है ,तब प्रकृति अत्यंत ही आनंदित और पुलकित होने लगती है और वातावरण में एक अलग सी ही स्फूर्ति सी आने लगती है।  

  • नए -नए पुष्प खिलने लगते है 
  • वृक्ष भी नयी कोपले निकालते है 
  • कोयल की मधुर -मीठी वाणी चारो तरफ गूंजती है 
  • पूरा वातावरण मानो स्वर्ग लगने लगता है 

चारो तरफ कोयल की मीठी बोली सुनाई पड़ती है , कही से फूलो की मन्द्रमुक्त खुशबु सभी को मोहित करती है। माँ सरस्वती के आगमन पर नयी - नयी कालिया खिलती है और बहुत से वृक्ष नई कोपले भी निकलने लगते है। 

सच कहा जाए तो मानो बसंत ऋतू में स्वयम प्रकृति भी माँ सरस्वती जी के स्वागत के लिए श्रृंगार करती है।  क्योकि चारो तरफ सुंदर -सुंदर फूल तथा बेले लगती है और माँ सरस्वती की पूजा का इन्तेजार करती है।  सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी में प्रकृति की छटा तो देखते ही बनती है। 

कवियों ने भी अपनी कविताओ में बसंत ऋतू तथा सरस्वती माँ की पूजा और उत्सव का अलग ही दृश्य दिखलाया है। 

विध्यार्थियों का उत्साह - 

जैसे ही बसंत ऋतू का आगमन इस धरती पर होती है तभी धीरे -धीरे से इस प्रकृति में बदलाव महसूस होने लगते है और इसी के साथ विध्यर्थियो के मन की बैचेनिया भी बढ़ने लगती है क्योकि उनकी माँ सरस्वती का त्यौहार आने वाला है।  

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स्टूडेंट्स के लिए यह त्यौहार ( सरस्वती पूजा ) इसलिए भी महत्त्व रखती है , क्योकि यही वो ख़ास मौका होता है ,जब सभी विद्यार्थी अपने मन की बात और अपनी इछाये माँ सरस्वती के सामने रखते है , ख़ास कारण यह भी है की माँ सरस्वती का सबसे प्रिय मौसम बसंत ऋतू का और दिन बसंत पंचमी का होता है। 

  • माँ सरस्वती की पूजा स्टूडेंट्स नए वस्त्र पहनते है 
  • सभी पीले कपडे और फूल एकत्रित करते है 
  • विद्यालय में त्यौहार सा माहौल होता है  

यदि तब कोई माँ की दिल से उपासना करे तब अवश्य माँ उसपर प्रसन्न होकर उसकी सभी मनोकामनाए पूरी कर देती है। 

यही कारण है की विध्यर्थियो के लिए यह त्यौहार और भी ख़ास हो जाता है ,सभी स्टूडेंट्स माँ सरस्वती की पूजा का बड़ी ही बेसब्री के साथ इंतज़ार करते है और समय आने पर बड़ी ही प्रसन्नता और धेर्य के साथ माँ की उपासना भी करते है। 

माँ सरस्वती की प्रिय वस्तुए - 

वैसे तो माँ सरस्वती को सबसे प्रिय उनके सचे उपासक ही होती है , फिर भी माँ सरस्वती जी को सफेल फूल और सफेदी बहुत ही ज्यादा पसंद होती है , माँ सरस्वती तो विद्या की देवी मानी जाती है ,इसलिए उन्हें भी विकसित बुद्धि के व्यक्ति ही अधिक पसंद होते है। 

जो माँ सरस्वती के सच्चे उपासक भी होते है, माँ सरस्वती को कमल के फूल भी बहुत ही पसंद होते है। आपने भी देखा होगा की माँ सरस्वती जी हमेशा ही कमल के फूलो के सिंहासन पर विराजमान होती है। माँ को सादगी के साथ - साथ इमानदारी भी बहुत पसंद होती है। 

  • माँ को वीना बहुत प्रिय होती है 
  • सफेदी होती माँ को बहुत ही प्रिय 
  • ज्ञान की मानी जाती है देवी माँ सरस्वती 

यदि आपको भी माँ सरस्वती जी को इस बार वसंत पंचमी पर प्रसन्न करना है। तब आपको भी अवश्य ही माँ को प्रसन्न करने के लिए उनकी पसंद की चीजों से उनका स्वागत करना चाहिए। 

उपसंहार -

दोस्तों हमारे जीवन में सही ज्ञान और सही बुद्धि की कितनी अधिक आवश्यकता होती है , ये तो आप सभी को पता ही है। तब हमें चाहिए की हम खुद के लिए सही ज्ञान और बुद्धि को ही अपने भीतर ग्रहण करे। इस दुनिया में ज्ञान और बुद्धि की देवी माँ सरस्वती जी है।  

माँ की पूजा प्रत्येक वर्ष को बसंत ऋतू में पंचमी के दिन आती है ,और इसी दिन सभी लोग माँ सरस्वती की पूजा करते है माँ की उपासना करते है। ताकि माँ सभी को सही बुद्धि प्रदान करे और हमारा समाज एक बेहतर दिशा में आगे बढ़ सके।  

  • जीवन में हमेशा इमानदारी रखिये 
  • ज्ञान और बुद्धि का सही उपयोग करे 
  • समाज कल्याण में भागीदारी दिखाए 
  • सही ज्ञान को हमेशा सीखते रहे 

हमें जीवन में व्यक्तिगत विकास करने के लिए सही ज्ञान की आवश्यकता होती है। सही ज्ञान प्राप्त करना और न करना केवल और केवल हमारे ही हाथो में होता है। क्योकि जीवन हमारा है तब सोचना भी हमें ही पड़ेगा। 

उम्मीद है आपको ये निबंध Essay On Saraswati Puja In Hindi अवश्य ही पसंद आया होगा। आपका कीमती समय देने के लिए थैंक्स। 

सरस्वती पूजा पर निबंध 10 लाईन तथा 200 शब्दों में  आपका इस आर्टिकल को पढ़ने के लिए बहुत -बहुत धन्यवाद। 

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